वाराणसी। सोनभद्र में जब पुलिस बालू माफियाओं के ट्रक पर पथराव करती है तो उसकी तस्वीरें कैमरे में कैद हो जाती हैं, लेकिन वाराणसी में यही पुलिस कैमरे के सामने मटरगश्ती करती नजर आती है। फर्क बस इतना है कि वहां की बर्बरता कैमरे में दर्ज हो जाती है और यहां की बेशर्मी पर्दे के पीछे छिपा दी जाती है।
पुलिस कमिश्नर को कई बार मीडिया ने आईना दिखाने की कोशिश की, मगर नतीजा शून्य ही रहा। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वजह क्या है, जो लगातार खबरें छपने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते दिखते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के थानों और चौकियों में अवैध वसूली और लूट का खेल खुलेआम चलता है। रोडवेज चौकी से लेकर अन्य इलाकों तक यह धंधा बेरोकटोक जारी है।
सबसे अधिक चर्चा सिगरा थाने की है, जहां कथित तौर पर “हनुमान माफिया” खुलेआम सक्रिय है और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। कार्रवाई के बजाय लीपापोती और संरक्षण का खेल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पुलिस कमिश्नर की ऐसी कौन-सी मजबूरी है, जिसके चलते लगातार मीडिया रिपोर्टिंग के बावजूद रोडवेज चौकी प्रभारी और कथित माफियाओं पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
शहरवासियों का कहना है कि वाराणसी की पुलिस अब जनता की सुरक्षा का पर्याय नहीं रह गई है, बल्कि लूट, वसूली और माफियाओं की रखवाली का दूसरा नाम बन चुकी है।













