रामपुर के बहुचर्चित फर्जी पैन कार्ड मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को दोषी ठहराते हुए सात-सात वर्ष की कैद की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। अदालत का यह फैसला प्रदेश की राजनीति में तेज हलचल पैदा कर रहा है।
यह मामला 2019 में दर्ज हुआ था, जब स्थानीय विधायक आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया कि अब्दुल्ला आज़म ने दो अलग-अलग तिथियों का उपयोग कर दो पैन कार्ड बनवाए। जांच आगे बढ़ी तो इस पूरी प्रक्रिया में आज़म खान की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उन्हें सह-आरोपी बनाया गया। अदालत ने सरकारी दस्तावेजों से जुड़ी इस धोखाधड़ी को गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी सजा दी।
फैसले के बाद समाजवादी पार्टी ने अदालत के निर्णय को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय “सत्ता के अहंकार और बदले की राजनीति” का परिणाम है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और न्याय की प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जा रहा है।
उधर, शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “कानून सबके लिए बराबर है” और यह साबित करता है कि गलत तरीके से पद, प्रभाव या पहचान का उपयोग कर कोई बच नहीं सकता।
सजा के ऐलान के बाद प्रशासन ने रामपुर में सुरक्षा बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि फैसले के विरोध में प्रदर्शन हो सकते हैं, इसलिए मुख्य चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह फैसला आज़म खान और उनके बेटे के भविष्य को गहरी चोट पहुंचा सकता है, क्योंकि सात साल की सजा होने के बाद उनकी चुनावी पात्रता पर सीधे प्रभाव पड़ेगा। वहीं, सपा इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी में जुटी है।













