चंदौली/लखनऊ। गणतंत्र दिवस–2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश के लिए यह न केवल सम्मान का क्षण है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की वर्षों की मेहनत को राष्ट्रीय पहचान मिलने का ऐतिहासिक अवसर भी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने प्रदेश की 15 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/सहयोगियों का चयन विशेष अतिथि के रूप में किया है, जो 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य राष्ट्रीय समारोह में शामिल होंगी।
यह चयन किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि संविधान की भावना के अनुरूप उस व्यवस्था का सम्मान है, जो गांव-गांव तक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और बाल विकास की नींव मजबूत करती है। मंत्रालय द्वारा 1 दिसंबर 2025 को जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार चयन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से किया गया है, जिसमें कार्य-निष्पादन, दक्षता, प्रतिबद्धता और जमीनी प्रभाव को प्राथमिकता दी गई।
चयन की शर्तें और प्रक्रिया
मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि चयन में केवल कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि वास्तविक फील्ड वर्क को आधार बनाया जाए।
इस प्रक्रिया में—
- पोषण अभियान में सक्रिय भूमिका
- गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी
- टीकाकरण कवरेज
- DBT कार्य, सर्वे, रिपोर्टिंग और सामाजिक जागरूकता
- जैसे मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कार्यकर्ताओं को ही चुना गया।
चयन की जिम्मेदारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO), मुख्य सेविका और नोडल अधिकारी को सौंपी गई थी। साथ ही यह भी निर्देश था कि किसी भी प्रकार की सिफारिश या दबाव को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाए।

उत्तर प्रदेश से चयनित 15 विशेष अतिथि
- बहराइच – श्रीमती हेमलता वर्मा
- चंदौली – श्रीमती निशा पाठक
- श्रावस्ती – श्रीमती पानकली
- सोनभद्र – श्रीमती दीप्ति सिंह
- फतेहपुर – श्रीमती संध्या श्रीवास्तव
- चित्रकूट – श्रीमती अरुंधती देवी
- बलरामपुर – श्रीमती सुनीता देवी
- सिद्धार्थनगर – श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव
- लखनऊ – सुश्री सौम्या
- गोरखपुर – श्रीमती गीतांजलि मौर्य
- गोरखपुर – श्रीमती संगीता कुमारी
- गोरखपुर – श्रीमती पुष्पा शुक्ला
- वाराणसी – श्रीमती रेणु सिंह
- वाराणसी – श्रीमती सुनीता त्रिपाठी
- वाराणसी – श्रीमती पुष्पा सिंह
खास बात यह है कि इस चयन में पूर्वांचल और अवध दोनों क्षेत्रों का संतुलित प्रतिनिधित्व देखने को मिला है, जिससे प्रदेश की सामाजिक विविधता भी राष्ट्रीय मंच पर उभरेगी।
प्रशासन और समाज की प्रतिक्रिया
चयन की सूचना मिलते ही संबंधित जिलों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे जिले के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह सम्मान सिर्फ 15 कार्यकर्ताओं का नहीं, बल्कि पूरे आंगनवाड़ी तंत्र का है। स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि वर्षों से सीमित संसाधनों में काम कर रही आंगनवाड़ी बहनों के लिए यह सम्मान उनके आत्मविश्वास और मनोबल को नई ऊंचाई देगा।
कर्तव्य पथ पर गांव की पहचान
कर्तव्य पथ वह मंच है, जहां देश अपनी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और प्रशासनिक प्रतिबद्धता दुनिया के सामने रखता है। इस बार उसी मंच पर गांव-गांव में बच्चों को पोषण देने वाली, माताओं को जागरूक करने वाली और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी एक मजबूत संदेश देगी— कि राष्ट्र निर्माण की असली नींव जमीनी स्तर पर रखी जाती है।
मानदेय से सम्मान तक की बहस
यह चयन एक बार फिर उस सवाल को सामने लाता है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा है—
क्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल “मानदेय कर्मी” कहकर सीमित किया जाना उचित है?
विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रण को कई लोग भविष्य में उनके मानदेय, सुविधाओं और सामाजिक सम्मान में सुधार की दिशा में एक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
एक प्रतीकात्मक लेकिन मजबूत संदेश
केंद्र और राज्य सरकार की इस पहल को यह संदेश माना जा रहा है कि—
“जो सबसे नीचे खड़े होकर व्यवस्था को संभालता है, वही सबसे पहले सम्मान का अधिकारी है।”
जब 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर तिरंगा लहराएगा, तब उस क्षण में उन आंगनवाड़ी बहनों की मेहनत, समर्पण और संघर्ष की कहानी भी शामिल होगी। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस भारत की तस्वीर है, जहां गांव की आवाज भी राष्ट्रीय मंच तक पहुंचती है।













