मणिकर्णिका घाट जाने से रोके गए सपा नेता, पुलिस घेरे में सांसद वीरेंद्र सिंह, घर के बाहर धरना—एक दर्जन नेता हाउस अरेस्ट
वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और मजबूतीकरण कार्य को लेकर सियासत रविवार को और गर्म हो गई। गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले समाजवादी पार्टी के नेता घाट की स्थिति का जायजा लेने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और विपक्ष ने प्रशासन पर खुलकर हमला बोला।
पुलिस कार्रवाई से नाराज सपा सांसद वीरेंद्र सिंह अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें और एमएलसी आशुतोष सिन्हा सहित एक दर्जन से अधिक सपा नेताओं को हाउस अरेस्ट में रखा है। सर्किट हाउस और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया, जिससे पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील नजर आया।
सपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर उन्हें मणिकर्णिका घाट की वास्तविक स्थिति देखने से रोक रहा है। उनका कहना है कि घाट पर विकास कार्य की आड़ में प्राचीन संरचनाओं, मढ़ियों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है, जिसकी सच्चाई सामने आने से प्रशासन डर रहा है। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और पुलिस ने लाठीचार्ज की धमकी तक दी।
दरअसल, यह विवाद साल की शुरुआत से चल रहा है। घाट के कार्यों के दौरान एक प्राचीन ऊंचे चबूतरे (मढ़ी) के टूटने की खबर सामने आई थी। विपक्ष ने इसे धार्मिक धरोहरों की तोड़-फोड़ बताया, जबकि प्रशासन का दावा है कि कोई मंदिर या पूजा स्थल क्षतिग्रस्त नहीं हुआ और केवल पुरानी, अनधिकृत संरचनाएं हटाई गई हैं। प्रशासन का यह भी कहना है कि सभी मूर्तियां पूरी तरह सुरक्षित हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरों ने विवाद को और हवा दी। प्रशासन का आरोप है कि कई तस्वीरें AI-जनरेटेड या पुरानी हैं, जिनके जरिए अफवाह फैलाई गई। इसी मामले में अब तक 8 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा ने 25 जनवरी को 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मणिकर्णिका घाट भेजने का फैसला किया था, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते योजना अधूरी रह गई। सपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन पर लोकतंत्र का गला घोंटने और धार्मिक आस्था की आड़ में सच छिपाने का आरोप लगाया।
मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म का सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थल माना जाता है। ऐसे में यहां हो रहा कोई भी कार्य राजनीतिक और धार्मिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है। सपा नेताओं ने साफ कहा है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और घाट पर जाने तथा सच्चाई सामने लाने की लड़ाई जारी रहेगी।













