मथुरा। ब्रज की पावन धरती पर होली का उत्सव इस बार भी अपनी अनोखी परंपराओं से रंग-बिरंगा रहा। मथुरा जिले के कोसीकलां थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक फालैन गांव में होलिका दहन के दौरान एक ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
पंडा परिवार के युवक संजू पंडा ने 20–25 फीट ऊंची और लगभग 30 फीट चौड़ी धधकती होलिका की प्रचंड लपटों और दहकते अंगारों के बीच से नंगे पैर दौड़ लगाकर सुरक्षित बाहर निकलकर सबको चौंका दिया। यह दृश्य पौराणिक कथा के भक्त प्रह्लाद की याद दिलाता है, जो अग्नि में भी अक्षुण्ण रहे थे।
घटना मंगलवार तड़के करीब 4 बजे की है, जब फालैन सहित आसपास के 11–12 गांवों की होलिकाएं एक साथ प्रज्वलित हुईं। संजू पंडा ने वसंत पंचमी से शुरू होकर पूरे 45 दिनों तक कठोर व्रत, ब्रह्मचर्य पालन, फलाहार और साधना की। वे प्रह्लाद मंदिर में रहकर तप करते रहे, भूमि-शयन किया और विशेष अनुष्ठान संपन्न किए। पूजा के बाद उनकी बहन ने जलते कलश से होलिका की परिक्रमा कर अर्घ्य अर्पित किया, जबकि गांव की महिलाओं ने दूध की धार चढ़ाई।
दैवीय संकेत मिलते ही संजू पंडा ने अग्नि में प्रवेश किया और कुछ ही क्षणों में बिना किसी झुलसन के बाहर निकल आए। इस अलौकिक क्षण को देखकर श्रद्धालु ‘प्रह्लाद महाराज की जय’, ‘नरसिंह भगवान की जय’ और ‘बांके बिहारी की जय’ के जयकारों से गूंज उठे। स्थानीय युवकों ने उन्हें कंधों पर उठाकर पूरे गांव में घुमाया।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और तहसील प्रशासन के अधिकारी मौके पर तैनात रहे।
फालैन गांव की यह परंपरा ‘पंडा मेला’ या ‘प्रह्लाद लीला’ के नाम से जानी जाती है और इसे सदियों पुरानी (करीब 5200 वर्ष) माना जाता है। मान्यता है कि यह गांव भक्त प्रह्लाद के वंशजों का है और पंडा परिवार पीढ़ियों से इस अनुष्ठान का निर्वहन करता आ रहा है।
यह घटना सनातन आस्था की अटूट शक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक मानी जाती है। ब्रज की यह अनोखी होली एक बार फिर सांस्कृतिक विरासत की गौरवशाली झलक प्रस्तुत करती है।













