वाराणसी। Varanasi में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। Supreme Court of India की सख्त रोक के बावजूद शहर के प्राचीन जल स्रोतों पर अतिक्रमण का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा मामला नगर निगम से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक Sonia Pokhara का है, जो इन दिनों भू-माफियाओं के निशाने पर है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पोखरे को तेजी से पाटा जा रहा है। मौके पर मौजूद तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि आधे से अधिक हिस्से को मलबे से भर दिया गया है, जबकि शेष भाग को भी समाप्त करने की कोशिश जारी है। यह वही पोखरा है, जिसके संरक्षण और सुंदरीकरण के बड़े-बड़े दावे किए गए थे।
बताया जाता है कि वर्तमान मेयर Ashok Tiwari ने पहले इस पोखरे को संरक्षित करने और उसे सुंदर बनाने की बात कही थी। इसके लिए नापी कराकर चारों ओर तारबंदी भी कराई गई थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह उलट दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अब इस जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा बढ़ता जा रहा है और धीरे-धीरे पोखरे का अस्तित्व मिटाया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस अवैध कार्य पर न तो जनप्रतिनिधियों की नजर पड़ रही है और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती दिख रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं इसे जानबूझकर नजरअंदाज तो नहीं किया जा रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि Sonia Pokhara केवल एक तालाब नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के जलस्तर को बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि इसे इसी तरह खत्म कर दिया गया, तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और अपील की है कि इस ऐतिहासिक जल स्रोत को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, अन्यथा जल्द ही सोनिया पोखरा सिर्फ यादों में ही सिमट कर रह जाएगा।













