चंदौली। क्षेत्र के प्रसिद्ध रामगढ़ गांव में इस वर्ष भी ऐतिहासिक और प्राचीन रामलीला का आयोजन होने जा रहा है। यह रामलीला करीब 152 वर्षों से निरंतर परंपरा के रूप में चल रही है और इस बार यह 21 सितम्बर से शुरू होकर 4 अक्टूबर तक चलेगी। आयोजन समिति ने इसकी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है।
आयोजन का शुभारंभ 21 सितम्बर को प्रभु श्रीराम जन्म की लीला से होगा और समापन 4 अक्टूबर को रामराज्य स्थापना व राजगद्दी के साथ किया जाएगा। इस पखवाड़े भर चलने वाले आयोजन में प्रतिदिन अलग-अलग प्रसंग मंचित किए जाएंगे, जिनमें आसपास के गांवों और कस्बों से हजारों लोग दर्शन करने के लिए जुटते हैं।
कार्यक्रम की रूपरेखा
- 21 सितम्बर – रामजन्म
- 22 सितम्बर – फूलवारी
- 23 सितम्बर – धनुषयज्ञ
- 24 सितम्बर – राम विवाह
- 25 सितम्बर – वनवास
- 26 सितम्बर – राम–केवट संवाद
- 27 सितम्बर – चित्रकूट
- 28 सितम्बर – नकटैया
- 29 सितम्बर – राम–सुग्रीव मित्रता
- 30 सितम्बर – लंका दहन
- 1 अक्टूबर – अंगद–रावण संवाद
- 2 अक्टूबर – लक्ष्मण–मेघनाद युद्ध, मेघनाद वध, राम–रावण युद्ध, रावण वध व 55 फीट ऊंचे रावण पुतले का दहन (विशाल मेला – बाबा कीनाराम मठ के सामने)
- 3 अक्टूबर – भरत मिलाप (दूसरा दिन मेला)
- 4 अक्टूबर – रामराज्याभिषेक (राजगद्दी)
भव्य मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम
इस बार का आयोजन खासतौर पर 2 और 3 अक्टूबर को बाबा कीनाराम मठ के सामने लगने वाले विशाल मेले के कारण आकर्षण का केंद्र रहेगा। दो दिवसीय मेले में जहां एक ओर धार्मिक लीलाओं का मंचन होगा, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और लोकसंगीत कार्यक्रम भी लोगों का मन मोह लेंगे।
लोकप्रिय गायक कलाकार मनोज कुमार पांडेय, मुन्ना पांडेय, विजय कुमार पांडेय और तबला वादक दीपक जी द्वारा रामायण गान व भक्ति संगीत प्रस्तुत किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में दूर-दराज़ से कलाकार शामिल होकर भक्तिमय वातावरण बनाएंगे।
संयोजक धनंजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि रामगढ़ की रामलीला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस रामलीला की ऐतिहासिकता और लोकप्रियता के कारण हर वर्ष यहां भारी भीड़ उमड़ती है और आस-पास का पूरा इलाका रामभक्ति के रंग में रंग जाता है।
परंपरा और आस्था का संगम
152 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही यह रामलीला आज भी उतनी ही जीवंत और लोकप्रिय है जितनी अपने शुरुआती दौर में थी। स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि आस-पास के ज़िलों से भी लोग परिवार सहित यहां पहुंचते हैं। खासकर रावण दहन, भरत मिलाप और रामराज्याभिषेक की लीलाओं को देखने के लिए विशाल जनसमूह उमड़ता है।
आयोजन समिति का कहना है कि इस बार की रामलीला को भव्य बनाने के लिए मंचन, साज-सज्जा और ध्वनि व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए भी प्रशासन से सहयोग लिया जा रहा है।













