प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े बड़े मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल समेत अन्य अभियुक्तों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली कुल 22 याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब सभी आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामला एनडीपीएस एक्ट के गंभीर प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ा है और इसमें प्रारंभिक जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया संगठित अपराध के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। ऐसे में इस स्तर पर किसी भी प्रकार की राहत देना उचित नहीं है।
बताया जा रहा है कि इस गिरोह का सरगना शुभम जायसवाल वर्तमान में दुबई में छिपा हुआ है और उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क देश-विदेश में फैले बड़े पैमाने पर कोडीन सिरप की अवैध सप्लाई से जुड़ा हुआ है।
मामले का खुलासा 18 अक्टूबर को सोनभद्र जिले में हुआ था, जब पुलिस ने 1.19 लाख बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद की थी। जांच के दौरान करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ। फर्जी फर्मों, जाली दस्तावेजों और दुबई-बांग्लादेश से जुड़े अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आए हैं। अब तक इस प्रकरण में 68 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 2 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की। इसके बाद लखनऊ, रांची, अहमदाबाद सहित देश के कई शहरों में करीब 25 ठिकानों पर छापेमारी की गई। ईडी ने मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल को समन भी जारी किया है। यदि वह पेश नहीं होता है तो उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है।
हाईकोर्ट के इस फैसले को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई से कोडीन सिरप माफिया पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।













