वाराणसी। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का आंदोलन मंगलवार को लगातार 384वें दिन भी जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर बनारस में कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर पावर कॉरपोरेशन पर उपभोक्ता विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बनारस में करीब 1 लाख 11 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 59,984 मीटर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदल दिए गए। संघर्ष समिति का आरोप है कि यह कार्रवाई विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पुराने और सही ढंग से चल रहे मीटरों को बदलना गैरकानूनी है और स्मार्ट मीटर स्वीकार न करने पर बिजली काटना उपभोक्ताओं पर दबाव बनाने का तरीका है।
बिजली कर्मियों ने केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री के संसद में दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि पोस्टपेड व्यवस्था अब भी डिफॉल्ट मोड में है और इसके बावजूद बिजली कंपनियों की वितरण हानि में कमी आई है। वक्ताओं के अनुसार घाटा 27 प्रतिशत से घटकर लगभग 19.5 प्रतिशत हो गया है, जिससे साफ है कि निजीकरण या जबरन प्रीपेड मीटर की जरूरत नहीं है।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की कि स्मार्ट मीटरों को जबरन प्रीपेड में बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और बिजली वितरण के निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए। साथ ही कर्मचारियों और अभियंताओं पर की जा रही कथित दमनात्मक कार्रवाई समाप्त करने की भी मांग की गई।
आंदोलनकारियों ने ऐलान किया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। निजीकरण रद्द होने तक बिजली पंचायत, महापंचायत, जनसभाएं और रैलियां जारी रहेंगी।
प्रदर्शन को अंकुर पाण्डेय, आनंद सिंह, राजेश सिंह, रंजीत पटेल, जयप्रकाश, धनपाल सिंह, राजेश पटेल, अजित पटेल, सरोज भूषण, प्रवीण सिंह, देवेंद्र सिंह, अरुण कुमार, रमेश कुमार, नागेंद्र कुमार सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।













