चंदौली। भारत की आर्थिक वृद्धि की चमकदार तस्वीर के पीछे पूंजी के असमान बंटवारे की एक सख़्त हक़ीक़त छुपी है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, देश की कुल घरेलू संपत्ति का 65% हिस्सा केवल 10% अमीर लोगों के पास है। इसका सीधा मतलब है कि देश की बड़ी आबादी मेहनत के दम पर जीवन गुज़ार रही है, जबकि संपन्न वर्ग अपने निवेश और पूंजी से और अधिक दौलत अर्जित कर रहा है।
देश की घरेलू देनदारियां भी लगातार बढ़ रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि घरेलू कर्ज़ 12.1% की दर से बढ़ा है और अब यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 41% तक पहुँच गया है। यानी आम भारतीय परिवार पहले से कहीं अधिक कर्ज़ के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर पूंजी का बंटवारा
पिछले एक दशक में संपत्ति का वैश्विक वितरण भी भारत की स्थिति को और गंभीर बनाता है।
- अमेरिका ने अकेले दुनिया की 47% संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया।
- चीन के पास 20% हिस्सेदारी पहुँची।
- पश्चिमी यूरोप को 12% हिस्सा मिला।
यानी वैश्विक स्तर पर भी संपत्ति का बड़ा भाग कुछ चुनिंदा देशों में सिमटा हुआ है।
भारत और विकसित देशों की तुलना
भारत की घरेलू संपत्ति में शेयर बाज़ार की हिस्सेदारी महज़ 13% है। वहीं, अमेरिका में यह आँकड़ा 59% और यूरोप में 35% तक पहुँच चुका है। यही वजह है कि भारत में लोग नौकरी और मेहनत पर ज़्यादा निर्भर हैं, जबकि पश्चिमी देशों में पैसा ही पैसे को बढ़ाने का साधन बन चुका है।
रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि—
- भारत में लोग काम करके दौलत बनाते हैं।
- अमेरिका और विकसित देशों में पैसा खुद पैसा कमाता है।
विशेषज्ञ की राय
LTP Calculator Financial Technology Pvt. Ltd एवं Daddy’s International School & Hostel, बिशुनपुरा कांटा, चंदौली के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का कहना है कि—
“भारत की ग्रोथ स्टोरी देखने में जितनी चमकदार लगती है, असल में उतनी संतुलित नहीं है। घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा अभी भी गैर-उत्पादक साधनों में फंसा है। अगर लोगों को सशक्त बनाना है तो बचत को प्रोडक्टिव एसेट्स और इक्विटी में लगाने की आदत डालनी होगी। तभी मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग अपने जीवन स्तर को सुधार पाएगा।”
बढ़ती असमानता का असर
- संपत्ति का बड़ा हिस्सा चुनिंदा लोगों के पास सिमट जाने से गरीब और मध्यवर्ग के लिए ऊपर उठना और कठिन हो रहा है।
- घरेलू कर्ज़ बढ़ने से परिवारों की आर्थिक स्वतंत्रता घट रही है।
- निवेश की कमी के चलते भारत की संपत्ति निर्माण की गति विकसित देशों की तुलना में धीमी बनी हुई है।
क्या होना चाहिए आगे?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को आर्थिक असमानता कम करने के लिए लोगों में निवेश की समझ विकसित करनी होगी।
- शेयर बाज़ार और इक्विटी में निवेश बढ़ाना होगा।
- घरेलू बचत को रियल एस्टेट या सोने तक सीमित रखने की प्रवृत्ति बदलनी होगी।
- वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) को मज़बूत करना होगा।













