जालौन। जिले के कुठौंद थाना क्षेत्र से शुक्रवार देर रात आई खबर ने पूरे पुलिस विभाग को हिला दिया। थाना प्रभारी अरुण कुमार राय (45) ने अपने सरकारी आवास में सर्विस पिस्टल से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। रात करीब 11 बजे हुई इस घटना की आवाज जैसे ही परिसर में गूंजी, वहां मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत भागकर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हालत गंभीर हो चुकी थी। उन्हें खून से लथपथ अवस्था में पाया गया और तत्काल जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, गोली चलने के ठीक बाद थाना परिसर में मौजूद एक महिला सिपाही को भारी घबराहट की स्थिति में कमरे से बाहर निकलते देखा गया। कुछ पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि वह तेज़ी से बाहर भागी, जिससे अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन ने अभी इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की है तथा पूरी घटना को “संदिग्ध” मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधीक्षक जालौन ने देर रात ही घटना स्थल का निरीक्षण किया और मौजूद स्टाफ से पूछताछ की। एसपी ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं है। मृतक थाना प्रभारी के मोबाइल फोन, कमरे की स्थिति, सर्विस पिस्टल और अन्य साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी पहलू को अनदेखा नहीं किया जाएगा — चाहे वह व्यक्तिगत तनाव हो, विभागीय दबाव हो या कोई अन्य कारण।
थाना प्रभारी अरुण कुमार राय जालौन जनपद में एक शांत और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। उनकी अचानक मौत ने पूरे पुलिस विभाग को सदमे में डाल दिया है। कई पुलिसकर्मियों ने बताया कि दिनभर वह सामान्य रूप से ड्यूटी करते नजर आए थे और किसी तरह की बेचैनी का अंदाज़ा नहीं हुआ था। रात के समय वह अपने आवास में अकेले थे और कुछ ही मिनटों में यह दर्दनाक घटना हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने आवास को सील कर दिया है और वैज्ञानिक टीम को बुलाकर विस्तृत पड़ताल कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के सही समय और गोली की दिशा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ पाएंगी। उधर महिला सिपाही के कमरे से निकलने की सूचना मिलने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएँ शुरू हो गई हैं, जिन पर रोक लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने अपील की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें।
जिले के पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय लोग इस त्रासदी से बेहद दुखी हैं। थाना परिसर और पुलिस लाइन में शोक का माहौल बना हुआ है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से संपर्क कर उनसे संवेदना व्यक्त की है और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिसकर्मियों पर मानसिक दबाव कितना गहरा होता है और क्या उनके लिए पर्याप्त काउंसलिंग या सपोर्ट सिस्टम मौजूद है। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस अधीक्षक ने टीम गठित कर सभी पहलुओं की गहन पड़ताल के निर्देश दिए हैं।













