चंदौली: सावन मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र, डीडीयू जंक्शन पर विशेष चेकिंग अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में, मंगलवार रात को एक बड़ी सफलता हाथ लगी जब रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (सीआईबी) की संयुक्त टीम ने अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए दो संदिग्ध यात्रियों को धर दबोचा। इन दोनों व्यक्तियों के पास से भारी मात्रा में नकद राशि बरामद की गई, जिसकी कुल कीमत ₹29,33,150 (उनतीस लाख तैंतीस हजार एक सौ पचास रुपये) थी, जो एक चौंकाने वाला आंकड़ा है।
बताया जा रहा है कि संयुक्त चेकिंग टीम को देखते ही दोनों व्यक्ति असहज हो गए और हड़बड़ाने लगे, जिससे उन पर तैनात सुरक्षाकर्मियों का संदेह और गहरा गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए, सुरक्षाकर्मियों ने उनके पास मौजूद बैग और झोलों की सघन तलाशी ली। तलाशी के दौरान, सभी की आंखें फटी रह गईं जब उनमें नोटों की कई गड्डियां भरी मिलीं। प्रारंभिक पूछताछ में, दोनों ही व्यक्ति इतनी बड़ी नकद राशि के स्रोत या उसके वैध लेनदेन के संबंध में कोई भी संतोषजनक दस्तावेज या जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, तत्काल प्रभाव से आयकर विभाग को सूचित किया गया और उन्हें मौके पर बुलाया गया।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान पुष्पेंद्र कुमार के रूप में हुई है, जो जनपद जौनपुर के मुगरा बादशाहपुर के निवासी हैं, और दूसरे व्यक्ति की पहचान आशीष कुमार मिश्रा के रूप में हुई है, जो जनपद प्रयागराज के हंडिया के रहने वाले हैं। मिली जानकारी के अनुसार, ये दोनों व्यक्ति वाराणसी से प्रयागराज की दिशा में यात्रा कर रहे थे, और संभवतः इस भारी नकदी को किसी गंतव्य तक पहुंचाने की फिराक में थे।
सूचना प्राप्त होते ही, आयकर विभाग, वाराणसी से सहायक निदेशक (जांच) उत्सव पांडेय अपनी टीम के साथ तुरंत डीडीयू जंक्शन पर पहुंचे। उन्होंने बरामद नकदी की विधिवत गिनती करवाई और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए, दोनों व्यक्तियों को आगे की गहन पूछताछ और विधिक कार्रवाई के लिए अपने साथ ले गए। अब आयकर विभाग इस पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर रहा है, ताकि इस अवैध लेनदेन के पीछे के असली मास्टरमाइंड और नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
यह पूरी कार्रवाई आरपीएफ डीडीयू के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत, जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह, और सीआईबी बल के कुशल नेतृत्व और समन्वय का परिणाम है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में आरपीएफ के अमरजीत दास, अर्चना मीणा, पवनेश कुमार सिंह, अजय पाल जैसे कर्मठ अधिकारी, जीआरपी के संदीप राय व अन्य स्टाफ, और सीआईबी के आरक्षी विनोद कुमार यादव जैसे जांबाज जवान शामिल थे, जिनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने इस बड़ी सफलता को संभव बनाया।
इस बड़ी बरामदगी को ‘ऑपरेशन सतर्क’ के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। बिना किसी वैध दस्तावेज के इतनी बड़ी मात्रा में नकदी का मिलना स्पष्ट रूप से हवाला या अन्य अवैध नकदी के लेनदेन की ओर इशारा करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। आयकर विभाग अब सभी संभावित पहलुओं से इस मामले की जांच कर रहा है, जिसमें यह पता लगाना भी शामिल है कि यह पैसा कहां से आया, इसे कहां ले जाया जा रहा था, और इसके पीछे कौन से बड़े गिरोह या व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। यह जांच निश्चित रूप से कई और बड़े खुलासे कर सकती है और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर लगाम लगाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।













