वाराणसी। बनारस (मंडुआडीह) रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह शंटिंग ऑपरेशन के दौरान बड़ा रेल हादसा हो गया, जब शिवगंगा एक्सप्रेस की दो खाली बोगियां पटरी से उतर गईं। यह घटना उस समय हुई जब ट्रेन का खाली रैक अनुरक्षण कार्य के लिए वाशिंग लाइन की ओर ले जाया जा रहा था। अचानक हुए इस तकनीकी हादसे से रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि रैक खाली होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार, सुबह के समय शंटिंग इंजन की सहायता से शिवगंगा एक्सप्रेस के खाली कोचों को यार्ड से वाशिंग लाइन की तरफ ले जाया जा रहा था। इसी दौरान अचानक दो बोगियां पटरी से उतर गईं। प्राथमिक आशंका जताई जा रही है कि शंटिंग इंजन की तकनीकी खराबी, सिग्नलिंग गड़बड़ी या ऑपरेशनल स्तर पर हुई लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। घटना उस समय हुई जब स्टेशन पर यात्री ट्रेनों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम थी, जिससे बड़ा संकट टल गया।
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। वाराणसी मंडल के डीआरएम आशीष जैन ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। उनके निर्देश पर रेलवे की रिकवरी टीम, इंजीनियरिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों ने तुरंत राहत एवं बहाली कार्य शुरू कर दिया। क्रेन और विशेष उपकरणों की मदद से बेपटरी हुई दोनों बोगियों को सावधानीपूर्वक पुनः पटरी पर चढ़ाया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कुछ घंटों के भीतर ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया गया।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना से किसी भी यात्री ट्रेन के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा। शिवगंगा एक्सप्रेस का रैक खाली था, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं उत्पन्न हुआ। मुख्य लाइन पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहा, हालांकि शंटिंग लाइन और वाशिंग लाइन के आसपास के कार्यों में कुछ समय के लिए व्यवधान अवश्य आया।
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच में शंटिंग प्रक्रिया, सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक की स्थिति और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। रेलवे प्रशासन ने कहा है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि बनारस (मंडुआडीह) स्टेशन पर यार्ड और शंटिंग ऑपरेशन के दौरान पहले भी छोटी-बड़ी तकनीकी घटनाएं सामने आती रही हैं। रेलवे कर्मचारी यूनियनों द्वारा समय-समय पर शंटिंग कार्य में कर्मचारियों की कमी, पुराने उपकरणों और बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ताजा घटना के बाद एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और यार्ड प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित है और ट्रेनों का संचालन सुचारू रूप से जारी रहेगा। वहीं जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी का परिणाम था या संचालन संबंधी चूक का।













