चंदौली। चंदौली-गाजीपुर मार्ग सहित मऊ, जौनपुर, आजमगढ़ और गोरखपुर जैसे कई जिलों को जोड़ने वाले तीरगांवा पुल पर लगाए गए लोहे के बैरियर ने स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बैरियर के कारण बड़ी सवारी बसें सीधे मार्ग से नहीं गुजर पा रही हैं और उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। जबकि बलुआ मार्ग पर लगे बैरियर को प्रशासन ने पहले ही हटा दिया है।
इस पुल का निर्माण चंदौली जनपद से गाजीपुर तक यात्रा को आसान बनाने और परिवहन सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। छोटे वाहन जैसे कार, बोलेरो और पिकअप आसानी से इस मार्ग से गुजर जाते हैं, लेकिन बड़े वाहन, विशेषकर सवारी बसें, अब मजबूरी में सैदपुर और वाराणसी होते हुए लंबा रूट अपनाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस कारण शादी, पारिवारिक आयोजनों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में आने-जाने वालों को भारी परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से न केवल चंदौली और गाजीपुर, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार तक की आवाज़-गमन सुविधा भी प्रभावित हो रही है। पहले भी इस मार्ग से भारी वाहनों के तेज़ आवागमन के चलते जिलाधिकारी के आदेश पर बैरियर लगाया गया था, लेकिन अब बैरियर हटाए बिना ट्रकों और बसों का आवाज़-गमन कठिन हो गया है।
ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि तीरगांवा पुल से बैरियर हटाया जाए ताकि मार्ग की मूल सुविधा बहाल हो और वाहनों का आवाज़-गमन सुचारू हो सके। उनका कहना है कि इससे न केवल लोगों की यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और सामाजिक गतिविधियों में भी सुधार आएगा।
स्थानीय लोग यह भी सुझाव दे रहे हैं कि पुल मार्ग पर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे और आवश्यक संकेत लगाकर मार्ग को खुला रखा जाए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द बैरियर हटाकर आम लोगों और यात्रियों की परेशानी दूर की जाए।









