चंदौली। गंगा का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। महज तीन दिनों में ही नदी का पानी किनारे छोड़कर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगा है। बलुआ घाट का पूरा इलाका जलमग्न होने के बाद अब बाजार और आसपास के घरों की ओर गंगा का पानी बढ़ने लगा है। इससे तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल है।
किसानों की उपजाऊ जमीन गंगा में समाई
गंगा किनारे बसे गांवों भुपौली, डेरवा, महड़ौरा, कांवर, पकड़ी, महुअरिया, विसुपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ, डेरवाकला, महुअर कला, हरधन जुड़ा, गंगापुर, पुराबिजयी, पुरागणेन, चकरा, सोनबरसा, टांडाकला, महमदपुर, सरौली, तीरगावा, हसनपुर, बड़गांवा, नादी निधौरा और सहेपुर आदि के हजारों किसानों की उपजाऊ जमीन बाढ़ के पानी में समाहित हो चुकी है। लगातार हो रहे जलस्तर वृद्धि से ग्रामीणों की फसलें और घरों तक खतरे में पड़ गए हैं।
तीसरी बार बाढ़ से सदमे में ग्रामीण
इस वर्ष पहले ही दो बार बाढ़ का प्रकोप झेल चुके लोग अब तीसरी बार जलस्तर बढ़ने से सदमे में हैं। गांवों के लोगों का कहना है कि इस बार गंगा का रौद्र रूप पिछले वर्षों से ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक धान और सब्जियों की फसलें लहलहा रही थीं, अब वहां सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
टांडा में बाजार और रिहायशी इलाकों पर खतरा
सबसे ज्यादा दहशत टांडा क्षेत्र में देखी जा रही है, जहां गंगा का पानी तेजी से बाजार और रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। दुकानदार और स्थानीय लोग अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश में जुट गए हैं। कई परिवारों ने घर छोड़कर रिश्तेदारों या ऊंचे इलाकों का रुख करना शुरू कर दिया है।
प्रशासन की कोशिशें तेज
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग सतर्क हो गया है। गांव-गांव में लोगों को अलर्ट किया जा रहा है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव और राहत दल की तैनाती पर जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का यह बढ़ता जलस्तर उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर रहा है। खेत, पशु और मकान सभी पर खतरा मंडरा रहा है। लोग सबसे ज्यादा चिंतित अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर हैं।













