शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस की शुरुआती लापरवाही के चलते एक युवक की हत्या का सच करीब दो साल तक दफन रहा। जिसे आगजनी के बाद जानवर का मांस समझकर फेंक दिया गया था, वह दरअसल एक इंसान का जला हुआ अवशेष निकला।
मामला 19 दिसंबर 2020 का है। उस दिन नईम की मोबाइल शॉप में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई थी। जांच के दौरान दुकान से जला हुआ मांस का एक टुकड़ा मिला। पुलिस ने इसे जानवर का मांस मानते हुए तालाब किनारे फिंकवा दिया, जबकि एक छोटा हिस्सा फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया गया। मौके से जले हुए अंडरवियर, हाथ का कड़ा और ताबीज भी बरामद हुए थे, जिन्हें पुलिस ने सील कर रखा।
कई दिन बाद एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि दुकान से मिला सामान उसके लापता बेटे अभिषेक यादव का हो सकता है। इसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। वर्ष 2022 में जब सील बंद पोटली खोली गई, तो परिजनों ने उसमें रखे कपड़े और सामान की पहचान अभिषेक के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने डीएनए जांच के लिए सैंपल फोरेंसिक लैब भेजे।
अब आई रिपोर्ट ने पूरे मामले से पर्दा उठा दिया है। फोरेंसिक जांच में पुष्टि हुई है कि जला हुआ मांस का टुकड़ा किसी जानवर का नहीं, बल्कि अभिषेक यादव का ही था। इससे साफ हो गया कि अभिषेक की हत्या कर शव को मोबाइल शॉप के अंदर जलाने की कोशिश की गई थी, ताकि पहचान मिटाई जा सके।
डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच दोबारा शुरू कर दी है। इस खुलासे ने न सिर्फ एक जघन्य अपराध को उजागर किया है, बल्कि शुरुआती जांच में हुई गंभीर चूक पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में दोषियों तक पुलिस कब और कैसे पहुंच पाती है।









