अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की मिसाइल क्षमता एक बार फिर वैश्विक चर्चा में है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमले रणनीतिक रूप से अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ईरान के शस्त्रागार में कौन-कौन सी प्रमुख मिसाइलें शामिल हैं और उनकी अनुमानित मारक क्षमता कितनी है।
ईरान की प्रमुख बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें
1. ज़ोल्फ़ाघार (Zolfaghar)
श्रेणी: शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल
अनुमानित रेंज: लगभग 700 किमी
2. क़ियाम (Qiam-1)
श्रेणी: बैलिस्टिक मिसाइल
रेंज: लगभग 700–800 किमी
3. शहाब-3 (Shahab-3)
श्रेणी: मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल
रेंज: लगभग 1,300 किमी
4. इमाद / ग़दर (Emad / Ghadr)
श्रेणी: उन्नत मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल
रेंज: लगभग 1,600–1,900 किमी
5. फतह-110 (Fateh-110)
श्रेणी: शॉर्ट रेंज प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल
रेंज: लगभग 300–1,400 किमी (विभिन्न वैरिएंट)
6. अबू महदी (Abu Mahdi)
श्रेणी: क्रूज मिसाइल
रेंज: लगभग 1,000 किमी
7. सेज्जिल (Sejjil)
श्रेणी: सॉलिड फ्यूल मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल
रेंज: लगभग 2,000 किमी
8. सूमर (Soumar)
श्रेणी: लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल
रेंज: लगभग 2,000–3,000 किमी (अनुमानित)
बैलिस्टिक मिसाइलों का बढ़ता उपयोग
हालिया संघर्ष में ईरान ने अपनी बैलिस्टिक और ड्रोन क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को संभावित लक्ष्य बताया गया है। इजरायल के प्रमुख शहरों — हाइफा और तेल अवीव — पर भी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने बीते दो दशकों में अपनी मिसाइल तकनीक में उल्लेखनीय विस्तार किया है। सॉलिड फ्यूल तकनीक, प्रिसिजन गाइडेंस सिस्टम और मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म ने उसकी सैन्य क्षमता को अधिक लचीला और त्वरित प्रतिक्रिया योग्य बनाया है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हालिया हालात पर बयान जारी करते हुए कहा कि देश असाधारण परिस्थिति से गुजर रहा है, लेकिन प्रशासनिक और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए प्रांतों को आवश्यक अधिकार सौंपने की बात कही।
रणनीतिक तस्वीर
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान के पास शॉर्ट रेंज से लेकर मीडियम और संभावित इंटरमीडिएट रेंज तक की मिसाइलें मौजूद हैं, जिनकी मारक क्षमता पश्चिम एशिया के बड़े हिस्से को कवर कर सकती है। हालांकि वास्तविक संख्या और सटीक क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं।
मौजूदा हालात में मिसाइल क्षमता ही इस संघर्ष की दिशा और प्रभाव को तय करने में निर्णायक कारक बन सकती है।













