वाराणसी। तापमान गिरते ही शहर में मच्छरों का प्रकोप अचानक बढ़ गया है। नगर निगम द्वारा करीब दस लाख रुपये खर्च करने और हर वार्ड में फॉगिंग मशीनें उपलब्ध कराने के बावजूद हालात काबू में नहीं आ पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी नवविस्तारित इलाकों में देखने को मिल रही है, जहां लोग लगातार फॉगिंग की मांग कर रहे हैं लेकिन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही।
कई वार्डों में खाली प्लॉटों में जमा पानी और लार्वा की बढ़ती संख्या ने डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा और बढ़ा दिया है। नगर निगम ने हाल में 50 हॉटस्पॉट चिह्नित किए थे, जहां पार्षदों के समन्वय से फॉगिंग कराई जा रही है। हर वार्ड के लिए पेट्रोल और डीजल की तय मात्रा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद मच्छर नियंत्रण के अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।
नगर निगम ने मच्छरों से जुड़ी शिकायतों के लिए टोल–फ्री नंबर 1533 जारी किया है। शिकायत मिलते ही संबंधित क्षेत्र में फॉगिंग मशीन भेजने की व्यवस्था की गई है। जिन तंग गलियों में बड़ी मशीनें या ड्रोन नहीं पहुंच पाते, वहां छोटी गाड़ियों से फॉगिंग की जाएगी। इस वर्ष फॉगिंग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल में भी बदलाव किया गया है ताकि लार्वा को बेहतर तरीके से नष्ट किया जा सके।
मलेरिया विभाग के साथ हाल में हुई बैठक में ड्रोन से दवा छिड़काव को और व्यापक बनाने पर सहमति बनी है। नगर निगम के पास उपलब्ध तीन ड्रोन का उपयोग उन इलाकों में किया जाएगा जहां जलभराव अधिक रहता है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सभी जोनल अधिकारियों को अपने–अपने क्षेत्रों में फॉगिंग की निगरानी और कार्रवाई को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके बावजूद शहरवासी बढ़ते मच्छरों को लेकर परेशान हैं और साफ–सफाई एवं नियमित फॉगिंग को लेकर नगर निगम से और अधिक प्रभावी प्रयास की मांग कर रहे हैं।









