चंदौली। पंडित कमलापति त्रिपाठी स्मृति सेवा संस्थान के तत्वावधान में मंगलवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के यशस्वी नायक पंडित कमलापति त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के अध्यक्ष डॉ. नारायण मूर्ति ओझा ने कहा कि “पंडित कमलापति त्रिपाठी न केवल काशी की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक थे, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक राजनीति के आधारस्तंभ भी थे।” उन्होंने बताया कि पंडित जी ने मात्र 15 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता आंदोलन में कदम रखा और गांधी जी के आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए कई बार जेल यात्रा की।
डॉ. ओझा ने आगे कहा कि पंडित जी का जीवन आदर्श, सादगी और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने पत्रकार, साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारतीय समाज को नई दिशा दी।
कार्यक्रम के संयोजक धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि पंडित कमलापति त्रिपाठी ने अपने 50 वर्षों के संसदीय जीवन में अनेक महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया। वे उत्तर प्रदेश के मंत्री, उप मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के नेता और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे। उनका व्यक्तित्व परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य करता था।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने पंडित जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति, सेवा और निष्ठा की मिसाल है। उनके विचार और सिद्धांत आज भी समाज को प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर डॉ. नारायण मूर्ति ओझा, गंगा प्रसाद, प्रदीप मिश्रा, श्रीकांत पाठक, दिनेश सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर पंडित जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।













