चंदौली। जिले के सबसे व्यस्त और संवेदनशील बाजार क्षेत्र में 18 नवंबर की रात करीब नौ बजे हुई दवा व्यवसायी रोहिताश पाल की निर्मम हत्या के बाद भी पुलिस मुख्य शूटरों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। पुलिस पिकेट से महज कुछ कदम की दूरी पर हुई इस सनसनीखेज वारदात ने जिले की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद बदमाश पैदल ही मौके से फरार हो गए, जबकि मौके की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी करीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक अपराधी काफी दूर निकल चुके थे।
घटना की सूचना मिलते ही जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिस अधीक्षक ने हत्याकांड के खुलासे के लिए कई थानों की पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच को जांच में लगाया। बावजूद इसके, इतने समय बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। न तो मुख्य शूटर गिरफ्तार हो सके हैं और न ही हत्या की पूरी कड़ी जनता के सामने आ सकी है। सूत्रों का कहना है कि कोई भी अपराध पूरी तरह से बेनिशान नहीं होता, लेकिन इस मामले में जांच एजेंसियों की सुस्ती और तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही है।
हत्या के बाद व्यापारी समाज में भारी आक्रोश फैल गया था। जिले के व्यापारियों ने एकजुट होकर आंदोलन शुरू किया, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा। पुलिस ने जांच के दौरान हत्या की साजिश को जमीनी विवाद से जोड़ते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सूत्रों के मुताबिक, साजिश में शामिल लोगों में एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि का करीबी भी बताया जा रहा है। साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद व्यापारी संगठनों ने आंदोलन स्थगित कर दिया, लेकिन असली सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर गोली चलाने वाले शूटर कहां हैं और पुलिस उन्हें क्यों नहीं पकड़ पा रही है।
शूटरों की गिरफ्तारी न होने से मृतक का परिवार आज भी भय के साये में जी रहा है। तेरहवीं के बाद भले ही परिजनों ने दुकान दोबारा खोल दी हो, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है। पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश होकर मंगलवार को मृतक के परिजन सदर विधायक के साथ सीधे मुख्यमंत्री दरबार पहुंचे और अपनी पीड़ा मुख्यमंत्री के सामने रखी। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इस हत्याकांड में अब तक किसी भी स्तर पर ठोस विभागीय कार्रवाई न होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि घटना वाले दिन चार्ज में रहे इंस्पेक्टर अपराध चंद्रकेश शर्मा ने परिजनों और व्यापारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया था, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया था। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस अधीक्षक को अपना पीआरओ विजय बहादुर सिंह मौके पर भेजना पड़ा था ताकि हालात को संभाला जा सके।
रोहिताश पाल हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और जनसुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। परिजनों और व्यापारियों को अब भी इंतजार है कि कब हत्यारे कानून के शिकंजे में आएंगे और उन्हें न्याय मिलेगा।













