चंदौली। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच चंदौली जनपद एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जिले के प्रतिष्ठित दवा व्यवसायी रोहिताश पाल की दिनदहाड़े हुई हत्या को एक महीना बीस दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक घटना को अंजाम देने वाले शूटर पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। यह स्थिति न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आम लोगों के भीतर सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता भी पैदा कर रही है।
रोहिताश पाल की हत्या को सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कानून-व्यवस्था के लिए खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। घटना के बाद पूरे जिले के व्यापारी वर्ग में आक्रोश फैल गया था। बाजार बंद रहे, विरोध प्रदर्शन हुए और एक ही सवाल हर जुबान पर था कि जब इतना बड़ा व्यापारी सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे ने नौ विशेष टीमों के गठन का ऐलान किया था। दावा किया गया कि तकनीकी, सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के जरिए हर पहलू से जांच की जाएगी। हालांकि, डेढ़ महीने बाद भी हकीकत यह है कि शूटरों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। नौ टीमों के बावजूद गिरफ्तारी न होना अब पुलिस की रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है।
जनदबाव के बीच पुलिस ने हत्या की साजिश रचने के आरोप में तीन स्थानीय व्यापारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इससे यह संदेश गया कि साजिश का खुलासा हो चुका है, लेकिन असली सवाल वहीं रह गया—गोली चलाने वाले कौन थे और वे कहां हैं। साजिशकर्ता जेल में हैं, लेकिन हत्या करने वाले अब भी आज़ाद घूम रहे हैं।
पुलिस की ओर से बताया गया कि जांच के दौरान 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। कई फुटेज में संदिग्धों की तस्वीरें भी सामने आईं, फिर भी शूटरों तक पहुंच नहीं हो सकी। यह स्थिति तब और चौंकाने वाली हो जाती है, जब आज के समय में छोटे अपराध भी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सुलझा लिए जाते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को भी लगाया गया, लेकिन STF भी अब तक कोई ठोस सफलता हासिल नहीं कर पाई है। इससे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब राज्य की सबसे सशक्त जांच एजेंसी भी नाकाम हो रही है, तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे।
करीब 20 दिन पहले पीड़ित परिवार स्थानीय विधायक रमेश जायसवाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला था। मुख्यमंत्री ने परिवार को न्याय का भरोसा और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन ज़मीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं। शूटर अब भी फरार हैं और परिवार न्याय की राह देख रहा है।
यह पहला मौका नहीं है जब चंदौली पुलिस किसी हत्याकांड में सवालों के घेरे में आई हो। अगस्त 2024 में चंदासी क्षेत्र में हुए बाइक मिस्त्री ओमप्रकाश गुप्ता हत्याकांड में भी आज तक शूटरों का सुराग नहीं मिला। इसी तरह जिले के अन्य क्षेत्रों में हुई कई हत्याओं की फाइलें अब तक अधूरी पड़ी हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं।
डीडीयू नगर के क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस टीमें पूरी मेहनत से काम कर रही हैं और जल्द सफलता मिलेगी, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए ऐसे बयान अब केवल औपचारिकता बनते जा रहे हैं। रोहिताश पाल का परिवार आज भी हर दिन इस उम्मीद में जी रहा है कि शायद आज कोई ठोस खबर आए।
यह मामला अब सिर्फ एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। यह पुलिस की जवाबदेही, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और न्याय व्यवस्था की गति पर बड़ा सवाल बन चुका है। यदि इस मामले में भी शूटरों की गिरफ्तारी नहीं हो पाती है, तो यह जिले के लिए एक खतरनाक संदेश होगा।
अब भी समय है कि जांच की दिशा और रणनीति पर नए सिरे से काम किया जाए, जिम्मेदारी तय हो और असली हत्यारे कानून के शिकंजे में आएं। क्योंकि अगर इस हत्याकांड में न्याय नहीं मिला, तो यह केवल एक परिवार की हार नहीं होगी, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक गहरा दाग बन जाएगा।













