राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे नीतीश कुमार, बिहार की राजनीति में बदल सकते हैं सत्ता समीकरण

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा जताया है और उसी विश्वास के साथ उन्होंने राज्य की सेवा की है। उन्होंने बताया कि राजनीति में आने के बाद से ही उनकी इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य भी बनें। इसी क्रम में अब उन्होंने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है।

नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा के सदस्य बनने के बाद भी उनका बिहार की जनता से जुड़ाव पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिहार के विकास के लिए उनका संकल्प जारी रहेगा और राज्य की नई सरकार को भी वे मार्गदर्शन और सहयोग देते रहेंगे।

बताया जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के लिए वे जल्द ही बिहार विधानसभा में नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी मौजूद रहने की संभावना है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है और विधानसभा में एनडीए के बहुमत को देखते हुए नीतीश कुमार का निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है। उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल से शुरू हो सकता है, जिसके बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि राज्य में सत्ता का नया फॉर्मूला सामने आ सकता है। फिलहाल जेडीयू से मुख्यमंत्री और भाजपा से दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन भविष्य में भाजपा का मुख्यमंत्री और जेडीयू के दो उपमुख्यमंत्री का फार्मूला लागू होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। भाजपा के पास विधानसभा में सबसे अधिक विधायक होने के कारण मुख्यमंत्री पद पर उसका दावा मजबूत माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भाजपा के मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनके पास वित्त, स्वास्थ्य और गृह जैसे अहम विभाग हैं और संगठन के साथ-साथ सरकार में भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और भाजपा के कुछ अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा किसी पिछड़े वर्ग या महिला नेता को भी मुख्यमंत्री बनाकर चौंकाने वाला फैसला ले सकती है।

इधर नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए भी सामने आ रहा है। हालांकि वे अब तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में पोस्टरों और कुछ कार्यक्रमों के जरिए उनके राजनीतिक प्रवेश के संकेत मिल रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने करीब 21 वर्षों में कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला है। ऐसे में उनके इस फैसले से भाजपा को पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है। वहीं जेडीयू के कुछ कार्यकर्ताओं में इस निर्णय को लेकर असंतोष की चर्चा भी सामने आ रही है। आने वाले दिनों में होने वाले आधिकारिक फैसले बिहार की सियासत की दिशा तय करेंगे।

ब्यूरो प्रमुख- ​पटना

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