चंदौली। जनपद के सैयदराजा नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर 9 स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर 3 में मिड-डे मील राशन गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि सितंबर 2024 में बच्चों के भोजन के लिए आवंटित करीब 24 कुंतल राशन का उठान तो हुआ, लेकिन वह बच्चों तक नहीं पहुंचा। इस प्रकरण में विद्यालय के इंचार्ज अध्यापक और वार्ड की सभासद पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं।
सोशल मीडिया से प्रशासन तक पहुँचा मामला
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब सोशल मीडिया पर गबन के आरोप वायरल हुए। देखते ही देखते यह मुद्दा स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हलकों तक पहुंच गया। विपक्षी दलों ने इसको सरकार की योजनाओं पर कलंक बताते हुए जिला प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आरोपों के घेरे में सभासद और अध्यापक
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वार्ड नंबर 9 की सभासद गीता देवी और विद्यालय के इंचार्ज अध्यापक मंसूर अंसारी ने आपसी मिलीभगत से राशन का उठान किया। लेकिन विद्यालय के रिकॉर्ड में न तो सही हिसाब दर्ज है और न ही इस अवधि में राशन खर्च होने के ठोस प्रमाण मिले।
अध्यापक की सफाई
इंचार्ज अध्यापक मंसूर अंसारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उठाया गया राशन बच्चों के मिड-डे मील में नियमित रूप से परोसा गया। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि सभासद द्वारा उठाए गए राशन की जानकारी उन्हें नहीं है और विभागीय जांच में पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा।
पूर्व प्रधानाध्यापक ने मानी गड़बड़ी
तत्कालीन प्रधानाध्यापक अनिल कुमार पांडेय ने माना कि सितंबर 2024 में कोटेदार से राशन का उठान तो हुआ था, लेकिन उसके खर्च का स्पष्ट अभिलेख नहीं है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी विभागीय जांच जरूरी है।
सभासद के प्रतिनिधि ने किया बचाव
सभासद गीता देवी के प्रतिनिधि अंकित जायसवाल ने कहा कि विद्यालय परिसर में अक्सर चोरी जैसी घटनाएं होती रहती हैं। इसी वजह से पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राशन का उठान सभासद ने किया था। उनका कहना है कि बच्चों को नियमित भोजन परोसा गया और कुछ राशन शेष है, जिसका हिसाब जल्द जमा किया जाएगा।
राजनीति में गरमी
इस प्रकरण के सामने आने के बाद पूरे जिले की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के हिस्से का भोजन ही हजम कर लिया गया तो सरकारी योजनाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जांच की दिशा पर टिकी निगाहें
फिलहाल, मामला जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी तक पहुंच चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन दोषियों पर कठोर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाता है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजरें अब सीधे जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।













