योगी सरकार में खुलेआम घूसखोरी : चकिया तहसील का लेखपाल अंश निर्धारण के नाम पर रिश्वत लेते रंगेहाथ कैमरे में कैद

चंदौली। योगी सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों के बीच चकिया तहसील का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वीडियो में तहसील का लेखपाल अनिल सोनकर खुलेआम अंश निर्धारण के नाम पर आवेदक से रिश्वत की मांग करता दिखाई दे रहा है।

वीडियो में साफ़ सुनाई देता है कि लेखपाल व्यक्ति से कहता है— “काम के बदले 1500 रुपये में बात हुई थी और आप सिर्फ़ 1200 रुपये दे रहे हैं।” यही नहीं, रुपये कम देने पर वह उसे “गाँव का ब्रोकर” तक कहकर ताना मारता है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि तहसील के संवेदनशील कार्य भी खुले बाजार की तरह पैसों की बोली पर निपटाए जा रहे हैं।

तहसील की सच्चाई उजागर

ग्रामीणों का आरोप है कि चकिया तहसील में बिना घूस दिए कोई भी कार्य संभव नहीं है।

  • अंश निर्धारण,
  • नामांतरण,
  • जाति/निवासी/आय प्रमाणपत्र,
  • और भूमि संबंधी अन्य कार्यों तक—हर प्रक्रिया के अपने “फिक्स रेट” तय हैं।

रकम पूरी न देने पर आवेदकों को बार-बार चक्कर लगवाया जाता है और फाइलें महीनों लंबित रहती हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रोश

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह वीडियो किसी एक कर्मचारी की हरकत नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की सच्चाई का आईना है। प्रशासन भले ही पारदर्शिता और सुशासन का दावा करे, लेकिन हकीकत यह है कि आम ग्रामीणों को तहसील में न्याय और सुविधा के लिए रिश्वत की कीमत चुकानी पड़ रही है।

ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज करने, आरोपी लेखपाल को निलंबित करने, और मामले की स्वतंत्र जांच आयोग से जांच कराने की मांग की है।

प्रशासन पर उठे सवाल

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे ज़िले में चर्चा का विषय बन गया है। लोग पूछ रहे हैं—

  • क्या जिला प्रशासन भ्रष्टाचार के इस खुले सबूत पर कड़ा कदम उठाएगा?
  • या फिर संरक्षण की ढाल तले यह मामला भी “फाइलों की धूल” में दबा दिया जाएगा?

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