लखनऊ| उत्तर प्रदेश में नशीली कफ सिरप की अवैध सप्लाई चेन पर शिकंजा कसते हुए एसटीएफ ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। महीनों से फरार चल रहा बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह आखिरकार लखनऊ में दबोच लिया गया। आरोपी पर लंबे समय से नशीली कफ सिरप की तस्करी वाले बड़े नेटवर्क में शामिल रहने का संदेह था, और उसकी तलाश कई जिलों की पुलिस कर रही थी।
सरेंडर से ठीक पहले हुई गिरफ्तारी
जांच में सामने आया कि आलोक सिंह कुछ समय से कोर्ट में आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहा था।
उसने लखनऊ की एक अदालत में सरेंडर की अर्जी भी दाखिल कर दी थी, जिसकी सुनवाई मंगलवार को होने वाली थी।
लेकिन एसटीएफ को मिले ताज़ा इनपुट और तकनीकी निगरानी ने उसकी योजना को पूरी तरह नाकाम कर दिया।
टीम ने उसे उससे पहले ही पकड़ लिया, जिससे वह अदालत तक पहुँच भी नहीं सका।
कफ सिरप नेटवर्क में था प्रमुख कड़ी
आलोक सिंह का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब कफ सिरप तस्करी से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ।
जांच एजेंसियों ने पाया कि यह नेटवर्क यूपी के कई जिलों से लेकर बिहार और बंगाल तक फैला हुआ है।
नशीली कफ सिरप की सप्लाई स्कूल-कॉलेज के युवाओं और नशे की लत वाले व्यक्तियों तक पहुँचाई जा रही थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर आलोक सिंह की कुछ पुरानी तस्वीरें पूर्व जौनपुर सांसद धनंजय सिंह के साथ वायरल हुईं, जिससे उसका नाम और भी चर्चा में आ गया। पुलिस विभाग ने उसे निलंबित करने के बाद बर्खास्त कर दिया था।
महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले — बड़े खुलासों की उम्मीद
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, आलोक सिंह को पकड़ने के दौरान उसके पास से कई महत्वपूर्ण कागजात, मोबाइल फोन्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए।
इनसे तस्करी नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने और सप्लाई रूट की जानकारी मिल सकती है।
टीम अब इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच करवा रही है।
कड़े अभियान के तहत हुई कार्रवाई
- उत्तर प्रदेश में नशे से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के लिए पुलिस विभाग विशेष अभियान चला रहा है।
- कफ सिरप तस्करी का यह नेटवर्क पिछले कुछ महीनों से कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।
- आलोक सिंह की गिरफ्तारी इस अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
- पुलिस उसे जल्द ही अदालत में पेश कर रिमांड पर लेकर नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश करेगी।













