लखनऊ| प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी को लेकर पिछले कुछ महीनों से चर्चाओं में रहें अंतरराज्यीय सिंडिकेट पर यूपी एसटीएफ ने एक और बड़ा वार किया है। कई राज्यों तक फैले इस नेटवर्क का अहम किरदार और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह आखिरकार लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई जब आरोपी कोर्ट में सरेंडर की तैयारी कर चुका था और उसकी अर्जी पर जल्द सुनवाई होनी थी।
फरारी के दौरान विदेश भागने की आशंका — जारी हुआ लुक आउट नोटिस
तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से आलोक सिंह लगातार पुलिस से बचता फिर रहा था।
जांच एजेंसियों को शक था कि वह किसी भी वक्त देश छोड़कर निकल सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए एसटीएफ ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया था और राजधानी समेत कई जिलों में उसके संभावित ठिकानों पर छापे डाले जा रहे थे।
पूर्व सांसद से नजदीकियों ने बढ़ाई चर्चाएँ
सूत्रों के मुताबिक, आलोक सिंह की एक पूर्व सांसद से करीबी की खबरें सामने आने के बाद यह मामला और हाई-प्रोफाइल हो गया था।
इसी कारण उसकी गिरफ्तारी को लेकर कई स्तरों पर निगरानी बढ़ा दी गई थी।
इससे पहले इस नेटवर्क से जुड़ी कड़ियाँ जोड़ते हुए अमित सिंह टाटा और शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल को भी पुलिस पकड़ चुकी है।
किंगपिन की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क पर कस सकता है शिकंजा
एसटीएफ अधिकारियों का मानना है कि आलोक सिंह सिंडिकेट का अहम हिस्सा था और उससे पूछताछ के बाद कई नई जानकारियाँ मिलने की उम्मीद है।
पुलिस अब इस बात की भी जांच करने में जुटी है कि तस्करी किए जा रहे प्रतिबंधित कफ सिरप की सप्लाई किन रास्तों से होती थी और इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल है।
अभियान को मिली बड़ी बढ़त
कफ सिरप तस्करी के खिलाफ चल रहे राज्यव्यापी अभियान में यह गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इससे पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में तेजी आएगी और आगामी दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।













