जशपुर में भयावह हादसा: ट्रेलर में घुसी कार, 5 दोस्तों की मौत

जशपुर। रविवार की सुबह जशपुर जिले के लिए काला दिन साबित हुई। कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-43) पर बीती रात हुई एक भीषण दुर्घटना ने पूरे जिले को दहला दिया। दुलदुला थाना क्षेत्र के पतराटोली में तेज रफ़्तार से दौड़ रही कार सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार पांचों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जिस रास्ते से वे हंसी-खुशी वापस लौट रहे थे, वही सड़क उनकी अंतिम यात्रा का मार्ग बन गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हुंडई i20 कार (CG 10 AD 7771) इतनी तेज रफ़्तार में थी कि ब्रेक लगाने का मौका तक नहीं मिला। तेज आवाज के साथ कार पीछे से ट्रेलर (NL 01 AB 1953) में फंस गई। हादसे का मंजर इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह तक कांप गई। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो चुका था और वाहन पहचानने लायक भी नहीं बचा था।

हादसे में मारे गए सभी युवक दुलदुला क्षेत्र के खटंगा गांव के रहने वाले थे और घनिष्ठ मित्र थे। वे आस्ता थाना क्षेत्र में आयोजित मेले से देर रात घर वापस लौट रहे थे। परिवारों को लगा कि बच्चे कुछ ही देर में पहुंच जाएंगे, लेकिन सुबह जिस खबर ने दरवाजे पर दस्तक दी, उसने पांचों घरों की दुनिया ही उजाड़ दी।

इस दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले युवकों की पहचान राधेश्याम यादव (26), उदय कुमार चौहान (18), सागर तिर्की (22), अंकित तिग्गा (17) और दीपक प्रधान (19) के रूप में हुई है। पांचों की उम्र कम थी, जिम्मेदारियाँ बड़ी थीं और सपने अभी अधूरे थे। एक पल में पाँच माँओं की गोद उजड़ गई, पाँच परिवारों की खुशियाँ हमेशा के लिए खामोश हो गईं।

इन सबमें सबसे हृदयविदारक कहानी दीपक प्रधान की है, जो अपने परिवार का इकलौता सहारा था। पिता अमर प्रधान की आँखों में विश्वास से ज्यादा सदमे का खालीपन दिख रहा था। पड़ोसियों के अनुसार दीपक सुबह-शाम काम कर परिवार का खर्च चलाता था। अब उसकी मौत ने पूरे घर को अंधेरे में धकेल दिया है। राधेश्याम यादव के भाई महेश्वर ने कहा कि “रात तक सब साथ थे, हंसी-मजाक कर रहे थे। सोचा भी नहीं था कि सुबह उन्हें इस हालत में देखेंगे।”

सूचना मिलते ही दुलदुला पुलिस मौके पर पहुँची और क्षतिग्रस्त कार को काटकर शवों को बाहर निकाला। पंचनामा कर सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि NH-43 पर रात में खड़े भारी वाहनों और तेज रफ़्तार का संयोजन बार-बार जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क पर निगरानी और कड़ाई की मांग फिर तेज हो गई है।

जशपुर में रातभर गूंजते मेले की खुशियाँ कुछ घंटों में चीख-पुकार में बदल गईं। पांच युवा, पांच घरों की उम्मीदें और पांच परिवारों के सपने एक ही झटके में खत्म हो गए। सड़क पर फैली टूटी कार, बिखरे सामान और मची खामोशी ही इस बात की गवाही दे रही थी कि NH-43 ने एक बार फिर किसी का घर उजाड़ दिया।

ब्यूरो प्रमुख- जशपुर

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