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शंकराचार्य जी बोले—बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता नहीं रुकी तो स्वतंत्र ‘हिंदूभूमि’ की मांग होनी चाहिए

वाराणसी। मानवता आज कठोर परीक्षा के दौर से गुजर रही है। एक ओर आध्यात्मिक उन्नति की बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश बांग्लादेश से आ रही अमानवीय घटनाएं अंतःकरण को व्यथित कर रही हैं। ईशनिंदा के मिथ्या और निराधार आरोप में निर्दोष दीपचंद्र दास को उन्मादी भीड़ द्वारा जिंदा जलाया जाना न केवल एक व्यक्ति की हत्या है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के माथे पर कलंक है। ये उद्गार वर्तमान में काशी प्रवास पर आए परमाराध्य परमधर्माधीश्वर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने व्यक्त किए।

शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि कोई भी धर्म प्रतिशोध और हिंसा का मार्ग नहीं सिखाता। हिंसा से प्रेरित होकर किया गया यह कृत्य घोर आसुरी प्रवृत्ति का प्रतीक है। जो लोग निहत्थे और निर्दोष व्यक्ति को अग्नि के हवाले करते हैं, वे किसी भी धर्म के अनुयायी नहीं हो सकते; वे केवल मानवता के शत्रु हैं। उन्होंने प्रशासन की अक्षमता और वैश्विक समुदायों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह मौन जघन्य अपराध में मूक सहमति जैसा प्रतीत होता है।

महाराजश्री ने अंतिम क्षण तक अपने धर्म पर अडिग रहने वाले पुण्यात्मा दीपचंद्र के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही अग्नि ने उनके नश्वर शरीर को नष्ट कर दिया हो, किंतु “नैनं दहति पावक:” के न्याय से उनकी आत्मा अविनाशी है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह उस निर्दोष आत्मा को अपने सायुज्य में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असह्य पीड़ा को सहने का धैर्य और साहस प्रदान करें।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभ्य समाज अब और मौन नहीं रह सकता। यह समय केवल प्रार्थना का नहीं, बल्कि न्याय के लिए हुंकार भरने का है। जब तक पीड़ित परिवार को न्याय और दोषियों को उनके कुकृत्य का कठोरतम दंड नहीं मिलता, तब तक धर्मसत्ता का यह स्वर शांत नहीं होगा।

शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि यदि बांग्लादेश में हिंदू समाज के साथ मिल-जुलकर सम्मानपूर्वक रहना संभव नहीं है, तो वहां के हिंदुओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उसी प्रकार स्वतंत्र “हिंदूभूमि” की मांग करनी चाहिए, जैसे कभी पाकिस्तान की मांग उठी थी।“ शुभस्ते पंथानः संतु”—न्याय का मार्ग ही एकमात्र कल्याणकारी मार्ग है।

उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी।

ब्यूरो प्रमुख- वाराणसी

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