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विश्वनाथ धाम से दशाश्वमेध घाट तक बनेगा पाथवे, अब 10-15 मिनट में पहुंच सकेंगे श्रद्धालु

वाराणसी। काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। जल्द ही श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से दशाश्वमेध घाट तक सीधी और सुगम कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इसके लिए गंगा किनारे एक विशेष पाथवे (सैरगाह मार्ग) का निर्माण शुरू कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालु दर्शन-पूजन के बाद गंगा के मनोरम दृश्यों का आनंद लेते हुए कुछ ही मिनटों में दशाश्वमेध घाट पहुंच सकेंगे।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा कराया जा रहा है। प्रस्तावित पाथवे श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से ललिता घाट, मीर घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, मान मंदिर महल और राजेंद्र प्रसाद घाट होते हुए दशाश्वमेध घाट तक बनाया जाएगा।

करीब तीन मीटर चौड़े इस पाथवे के निर्माण पर 6.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे मार्ग के दोनों तरफ मजबूत रेलिंग भी लगाई जाएगी, ताकि आवाजाही सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहे।

शासन की ओर से इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद पहली किस्त के रूप में 2.50 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। निर्माण कार्य का जिम्मा सक्षम इंटरप्राइजेज को सौंपा गया है। ठेकेदार कंपनी ने दशाश्वमेध घाट और ललिता घाट दोनों दिशाओं से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

वर्तमान में कई घाटों की सीढ़ियां काफी ऊंची होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई घाटों के बीच सीधा संपर्क न होने से श्रद्धालुओं को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वनाथ धाम और दशाश्वमेध घाट के बीच की दूरी मात्र 10 से 15 मिनट में तय की जा सकेगी।

यह परियोजना केवल आवागमन को आसान नहीं बनाएगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई पहचान देगी। श्रद्धालु अब बिना भीड़भाड़ और अतिरिक्त दूरी तय किए सीधे गंगा आरती स्थल तक पहुंच सकेंगे। इससे काशी आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों का अनुभव भी बेहतर होगा।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष वाराणसी दौरे के दौरान केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के सचिव ने गंगा घाटों के सुंदरीकरण और उनके बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया था। इसके बाद पर्यटन विभाग ने विस्तृत योजना तैयार की। हाल ही में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भी घाटों का निरीक्षण कर निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।

परियोजना पूरी होने के बाद काशी के ऐतिहासिक घाटों की सुंदरता और धार्मिक महत्व को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी और काशी की पर्यटन व्यवस्था पहले से अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बन सकेगी।

वाराणसी ब्यूरो चीफ-अमर शर्मा

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