दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी: पत्रकारिता में जवाबदेही जरूरी, सरकार बनाए नियामक व्यवस्था

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा है कि इसके साथ जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रेस की आजादी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और बदलते डिजिटल दौर में पत्रकारिता के लिए प्रभावी नियामक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन और माइक्रोफोन के सहारे कोई भी स्वयं को पत्रकार या रिपोर्टर बताने लगता है। अदालत ने कहा कि ऐसे कई लोगों के पास न तो पत्रकारिता का आवश्यक प्रशिक्षण होता है और न ही उनके कार्यों के प्रति कोई जवाबदेही तय होती है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस दिशा में उचित नियामक ढांचा तैयार करने पर विचार करने की आवश्यकता जताई। अदालत का कहना था कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जिससे एक ओर प्रेस की स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित रहे और दूसरी ओर फर्जी, गैर-जिम्मेदाराना तथा डराने-धमकाने वाली पत्रकारिता पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या गैर-जिम्मेदाराना आचरण को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। अदालत की इस टिप्पणी को डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय कंटेंट क्रिएटर्स एवं यूट्यूब आधारित पत्रकारिता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्यूरो प्रमुख- नई दिल्ली

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!