वाराणसी। सेवापुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (MDR-TB) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी और उपयोगी दवाएं परिसर में फेंकी हुई मिलीं। दवाएं पुराने भवन के बारजे के नीचे पड़ी थीं, जिन पर निर्माण वर्ष 2024 और एक्सपायरी 2027 अंकित है—यानी ये पूरी तरह उपयोग योग्य थीं।
फेंकी गई दवाओं में आइसोनियाजिड, लिंजोलीड और पैराडॉक्सिन टैबलेट शामिल हैं। ये दवाएं एमडीआर टीबी के इलाज में बेहद अहम मानी जाती हैं। आइसोनियाजिड पहली पंक्ति की दवा है, जबकि लिंजोलीड शॉर्ट कोर्स ग्रुप-ए की प्रभावी दवा है। पैराडॉक्सिन (विटामिन B-6) इन दवाओं के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए दी जाती है।
स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि टीबी मरीजों को दवाएं लेने के लिए कई बार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन अक्सर दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं या कर्मचारी मौजूद नहीं रहते, जिससे मरीजों को परेशानी होती है। ऐसे में उपयोगी दवाओं का इस तरह फेंका जाना सवाल खड़े करता है।
इस मामले में केंद्र प्रभारी डा. अमित कुमार सिंह ने अनभिज्ञता जताई, वहीं टीबी सुपरवाइजर माधव कृष्ण मालवी ने भी दवाएं फेंके जाने की जानकारी से इनकार किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डा. एनडी शर्मा ने जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजेश प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि जांच में लापरवाही साबित होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना स्वास्थ्य विभाग में स्टॉक प्रबंधन की कमी, कर्मचारियों की जवाबदेही के अभाव और दवा वितरण व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है। टीबी जैसी गंभीर बीमारी के नियंत्रण में इस तरह की लापरवाही न केवल मरीजों के इलाज को प्रभावित करती है, बल्कि सरकारी संसाधनों की भी भारी बर्बादी है।
स्थानीय मरीजों का कहना है कि उन्हें समय पर दवा नहीं मिलती, जबकि दवाएं परिसर में यूं ही फेंकी जा रही हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है और त्वरित सुधार की मांग कर रही है।













