वाराणसी। प्रख्यात जनकवि सुदामा पांडे ‘धूमिल’ की खंडित प्रतिमा के निरीक्षण के दौरान उनकी साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। विट्ठलपुर के समीप पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और साहित्यकारों ने प्रतिमा की स्थिति का जायजा लिया तथा इसके संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की।
निरीक्षण के दौरान विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने घोषणा की कि अपनी परिषद सदस्य निधि से धूमिल जी के नाम पर एक पार्क और आधुनिक वाचनालय (पुस्तकालय) का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को धूमिल के साहित्य, विचारों और सामाजिक चेतना से जोड़ने का माध्यम बनेगी।
धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि खंडित प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा स्थापित कराने के लिए जिलाधिकारी से शीघ्र वार्ता की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रतिमा निर्माण और स्थापना के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जनकवि को उनकी गरिमा के अनुरूप सम्मान मिल सके।
निरीक्षण में एडीएम (ई), एसडीएम राजातालाब, साहित्यकार, इतिहासकार और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापक भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में धूमिल की साहित्यिक धरोहर को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया और इस पहल का स्वागत किया।
साहित्यकारों का कहना था कि धूमिल केवल एक कवि नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की सशक्त आवाज थे। ऐसे में उनकी स्मृति को संरक्षित करने के लिए पार्क, पुस्तकालय और नई प्रतिमा का निर्माण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगा।









