चंदौली। डीडीयू नगर (मुगलसराय) में प्रदूषण फैलाने के आरोप में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक औद्योगिक इकाई के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय निवासी विकास शर्मा द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए फैक्ट्री को नोटिस जारी किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मेसर्स कुमार औद्योगिक विकास प्रा. लि. से लगातार जहरीला काला धुआं निकल रहा है, जिससे आसपास के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है।
शिकायत के अनुसार फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं इतना अधिक था कि आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगी थीं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई थी, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही थी। इसके बाद मामला आईजीआरएस पोर्टल पर पहुंचा, जहां शिकायत दर्ज होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण board की टीम ने उद्योग का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि फैक्ट्री में भाप उत्पादन के लिए 8 टन प्रति घंटा और 3 टन प्रति घंटा क्षमता के दो बॉयलर संचालित किए जा रहे थे। इन बॉयलरों में ईंधन के रूप में बायो-ब्रिकेट्स का उपयोग किया जा रहा था।
निरीक्षण के दौरान टीम ने फैक्ट्री परिसर से निकल रहे काले धुएं पर आपत्ति जताई। अधिकारियों ने पाया कि उत्सर्जन मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए आवश्यक सुधार करने और पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो फैक्ट्री के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का कहना है कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहा था, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही थी। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि रात के समय धुएं का असर और अधिक बढ़ जाता था।
फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मामले की आगे जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं क्षेत्र में मौजूद अन्य औद्योगिक इकाइयों पर भी निगरानी बढ़ाई जा सकती है, ताकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।













