रायगढ़। विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अवसर पर रायगढ़ के राजामहल के पास क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल लैब) का शुभारंभ किया। इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस जांच व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।
नई एफएसएल लैब शुरू होने के बाद हत्या, दुष्कर्म, आत्महत्या और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों की जांच के लिए नमूनों को बिलासपुर भेजने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। अब अधिकांश वैज्ञानिक परीक्षण स्थानीय स्तर पर ही किए जा सकेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया तेज होगी और मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच प्रणाली से मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
इस अवसर पर ओ.पी. चौधरी ने इसे रायगढ़ जिले के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि एफएसएल लैब शुरू होने से अपराध जांच की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जांच रिपोर्ट मिलने से पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा।
सीन ऑफ क्राइम यूनिट रायगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. पी.एस. भगत ने बताया कि क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों सहित कुल 28 पद स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही रायगढ़ की सीन ऑफ क्राइम यूनिट के लिए अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट वाहन भी स्वीकृत किया गया है, जिससे घटनास्थल पर तत्काल वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और प्रारंभिक जांच संभव हो सकेगी।
कार्यक्रम में राधेश्याम राठिया, देवेन्द्र प्रताप सिंह, जीवर्धन चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह भी उपस्थित रहे।













