आजमगढ़। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी (दिशा) समिति की बैठक के दौरान सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया, जब एमएलसी देवेंद्र सिंह ने पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एसपी को तत्काल निलंबित कर जेल भेजने की मांग कर दी, जिससे बैठक में हड़कंप मच गया।
एमएलसी ने आरोप लगाया कि पुलिस “गुडवर्क” दिखाने के लिए फर्जी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि वादी ने खुद एफआईआर में लिखा था कि उसके साथ लूट या छिनैती नहीं हुई, बल्कि बैग गिर गया था। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को लूट का रूप देकर कार्रवाई की।
देवेंद्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि एक भाजपा बूथ अध्यक्ष को फंसाने के लिए कथित तौर पर उसकी आंख पर पट्टी बांधकर गोली मारी गई और उसे मुठभेड़ का रूप दे दिया गया। उन्होंने कहा कि “आजमगढ़ के पुलिस कप्तान की जगह जेल में होनी चाहिए” और दोहराया कि एसपी पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह मामला अभिषेक उर्फ धर्मेंद्र सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे पुलिस ने जियो कंपनी के मैनेजर से लूट के आरोप में “हाफ एनकाउंटर” के बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार आरोपी अभिषेक सिंह जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के चकलाल चंद गांव का निवासी है और उसके खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं।
इस पूरे प्रकरण पर उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से सफाई भी सामने आई है। आजमगढ़ एसपी सिटी ने बताया कि जांच के दौरान करीब 1000 सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें से 100 फुटेज में तीन आरोपियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई हैं।
बैठक के दौरान एमएलसी ने निजी स्कूलों में किताब और ड्रेस को लेकर हो रही कथित अनियमितताओं पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश देने की बात कही कि छात्रों को किसी एक दुकान से किताब-कॉपी या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। साथ ही विभिन्न दुकानों पर प्रतिस्पर्धी दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।













