कोलकाता। देशभर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठ रहे सवालों और बढ़ते विरोध के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार अब पोस्टपेड स्मार्ट मीटर मॉडल लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें उपभोक्ताओं को पहले बिजली इस्तेमाल करने और बाद में बिल भुगतान करने की सुविधा मिलेगी।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बाद सरकार को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं ने अधिक बिलिंग, तकनीकी गड़बड़ियां और बैलेंस समाप्त होने पर अचानक बिजली आपूर्ति बंद होने जैसी समस्याओं को लेकर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद मई 2026 से योगी सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड व्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के मुताबिक, अधिकांश उपभोक्ताओं को पोस्टपेड बिल जारी किए जा चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर तकनीकी कारणों से बिल जारी करने की प्रक्रिया अभी जारी है।
इधर, पश्चिम बंगाल में भी पहले स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं ने अधिक बिल आने और बिजली सेवाओं में बाधा की शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने शुरुआत से ही पोस्टपेड व्यवस्था अपनाने का निर्णय लिया है।
हालांकि उत्तर प्रदेश में कई उपभोक्ता अभी भी अपने पुराने प्रीपेड बैलेंस के समायोजन और बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। बिजली विभाग का कहना है कि सभी उपभोक्ताओं के बकाया बैलेंस का समायोजन आगामी बिलों में कर दिया जाएगा।
इस बीच, विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर सरकार से अधिक पारदर्शिता और बेहतर तकनीकी तैयारी की मांग की है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले सॉफ्टवेयर संबंधी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
स्मार्ट मीटरों को लेकर लगातार हो रहे विरोध और शिकायतों ने बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पोस्टपेड मॉडल लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को कितनी राहत मिलती है और क्या इससे विवादों पर विराम लग पाता है।













