चंदौली। जनपद चंदौली के तहसील पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर अंतर्गत ग्राम सभा ताहीरपुर में सरकारी एवं ग्राम सभा की भूमि पर कथित अवैध कब्जे और बहुमंजिला भवन निर्माण के मामले में शिकायतकर्ता ईशान मिल्की ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र सौंपकर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 68 श्रेणी 6-2 (अकृषिक भूमि–आबादी) के रूप में दर्ज है, जबकि गाटा संख्या 67 राजस्व रिकॉर्ड में नाला के रूप में दर्ज है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गाटा संख्या 67 के संबंध में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय द्वारा पूर्व में बेदखली एवं जुर्माने का आदेश भी पारित किया जा चुका है।
प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत गोपालपुर की वर्तमान ग्राम प्रधान श्रीमती फातिमा बेगम एवं उनके पुत्र बदरे आलम उर्फ रिंकू द्वारा गाटा संख्या 67 एवं 68 पर कथित रूप से कब्जा कर बहुमंजिला भवन का निर्माण कराया गया है, जिसका वर्तमान में निजी आवास के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि भवन निर्माण के दौरान ग्रामीणों के बीच यह जानकारी दी गई थी कि यहां आंगनबाड़ी केंद्र बनाया जा रहा है, जिससे किसी प्रकार का विरोध या शिकायत न हो। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि बेदखली का आदेश पारित होने के बावजूद आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते कथित अतिक्रमण बरकरार है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है।
इसके साथ ही शिकायत में दोनों गाटा संख्याओं का राजस्व विभाग से सीमांकन कराने, यह निर्धारित करने कि भवन का कौन-सा भाग किस गाटा पर स्थित है तथा यदि निर्माण वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के अधिकार क्षेत्र में आता है तो स्वीकृत मानचित्र, भवन निर्माण अनुमति एवं अन्य वैधानिक स्वीकृतियों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ईशान मिल्की ने कहा है कि यदि जांच में सरकारी अथवा ग्राम सभा की भूमि पर अतिक्रमण या अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए।
नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना-पत्र पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष आना शेष है।













