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कोयला स्टॉक जांच खबर: अब 3D स्कैनर से होगी सटीक माप

कोरबा। कोयला खदानों में कोल स्टॉक की जांच व्यवस्था अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी सभी अनुषंगी कंपनियों में पारंपरिक मापन प्रणाली को बदलकर अत्याधुनिक तकनीक लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कोयले के स्टॉक की माप थ्रीडी लेजर स्कैनर, न्यूक्लियर डेंसिटोमीटर और वैज्ञानिक फार्मूलों के जरिए की जाएगी, जिससे आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता दोनों में बड़ा सुधार होगा।

अब तक खदानों में कोयले के ढेर का आकलन पारंपरिक तरीकों से किया जाता था, जिसमें त्रुटियों की संभावना बनी रहती थी। इसी को देखते हुए कोल इंडिया बोर्ड ने नई तकनीक अपनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2011 में लागू “न्यू येलो बुक” के बाद खनन क्षेत्र में आए तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए 2018 में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने विस्तृत अध्ययन और बैठकों के बाद आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की, जिसे कोयला मंत्रालय के दिशा-निर्देश पर अप्रैल 2026 से लागू कर दिया गया है।

नई प्रणाली के तहत इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन, थ्रीडी टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनर और एयरबोर्न लेजर स्कैनर का उपयोग कर कोयले के ढेर की सटीक माप ली जाएगी। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से कोयले के वॉल्यूम की गणना की जाएगी। साथ ही वजन और आयतन के सही अनुपात के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाएगी, जिससे स्टॉक का वास्तविक आंकलन संभव हो सकेगा।

कोल इंडिया ने यह भी तय किया है कि कन्वर्जन फैक्टर का हर तीन साल में पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। यदि कोयले का ग्रेड बदलता है या नया स्टॉक तैयार होता है तो उसकी दोबारा गणना की जाएगी। ढीले कोयले के स्टॉक के लिए टिप्परों के वजन और आयतन के आधार पर माप सुनिश्चित किया जाएगा।

नई तकनीक लागू होने से खदानों में कोयला चोरी और स्टॉक के गलत आकलन पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है। ओवररिपोर्टिंग जैसे मामलों पर भी अब सख्त निगरानी रखी जाएगी, जिससे कंपनियों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

इसके अलावा पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है। तौल पर्चियों और फील्ड नोट्स पर समिति के सभी सदस्यों और वे-ब्रिज प्रभारी के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। साथ ही सभी माप को मेजरमेंट बुक में दर्ज किया जाएगा।

अधिकारियों का मानना है कि इस हाईटेक व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मानवीय त्रुटियों में भी कमी आएगी और उत्पादन व स्टॉक की निगरानी रीयल टाइम में अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी।

ब्यूरो प्रमुख- ​कोरबा

Ruchi Chaubey Avatar

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