चंदौली। धानापुर थाना क्षेत्र के हिंगुतरगढ़ गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक खिलाड़ी एवं ओलंपियन शिवपाल सिंह को बलुआ थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में शिवपाल सिंह के पिता रामाश्रय सिंह ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
रामाश्रय सिंह का आरोप है कि बलुआ थानाध्यक्ष ने दूसरे मामले में उनके बेटे को फंसाया है और इससे उसके खेल करियर को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
उन्होंने बताया कि शिवपाल सिंह ने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए वुहान (चीन) में आयोजित वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में स्वर्ण पदक जीता, नेपाल के काठमांडू में पदक हासिल किए, दोहा में भी स्वर्ण पदक जीता तथा टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
पिता का कहना है कि जिस सर्राफा व्यवसायी से चेन छिनने और मारपीट के मामले में शिवपाल सिंह को जेल भेजा गया है, उस घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे। उनका आरोप है कि पुलिस ने सभी तथ्यों की जांच किए बिना जल्दबाजी में कार्रवाई की।
रामाश्रय सिंह ने कहा, “अगर मेरे बेटे ने अपराध किया है तो हम देश छोड़ने को तैयार हैं और अपनी जमीन बेचकर पीड़ित को दस गुना क्षतिपूर्ति देने को भी तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि देश, प्रदेश और जिले का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवपाल सिंह को उनकी खेल उपलब्धियों के लिए लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित किया था। साथ ही उन्होंने कहा कि परिवार बलुआ थानाध्यक्ष के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई से परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक नुकसान हुआ है।
हालांकि, इस मामले में बलुआ थाना पुलिस का पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नोट: अदालत में मामला विचाराधीन होने और जांच जारी रहने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाता। पिता द्वारा लगाए गए सभी आरोप उनके व्यक्तिगत दावे हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।













