लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों में चुनावी सफलता के बाद अब पार्टी का फोकस उत्तर प्रदेश पर केंद्रित माना जा रहा है। ऐसे में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलावों की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद प्रदेश भाजपा में नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में भूमिका देने और युवा चेहरों को प्रदेश संगठन में आगे लाने की रणनीति पर मंथन चल रहा है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Naveen के साथ संगठन में संभावित बदलावों को लेकर चर्चा की है। प्रदेश स्तर पर संभावित नामों की सूची भी तैयार किए जाने की बात सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार टीम योगी के कई नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इनमें कुछ ऐसे मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनकी प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल उठे, लेकिन जातीय और संगठनात्मक समीकरणों में उनकी उपयोगिता को देखते हुए उन्हें नई भूमिका दी जा सकती है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिन नेताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं, उनमें डॉ. महेंद्र सिंह, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य, अशोक कटारिया, एमएलसी अनूप गुप्ता, संतोष सिंह, विजय बहादुर पाठक, अश्विनी त्यागी और पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा प्रमुख हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी बदलाव की अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि राष्ट्रीय महासचिव पद पर अरुण सिंह या मोहन दास अग्रवाल में से किसी एक को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पदों पर भी नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
प्रदेश संगठन में संभावित फेरबदल के दौरान जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को खास प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। पश्चिम क्षेत्र में गुर्जर और वैश्य समाज, अवध में ब्राह्मण, ब्रज क्षेत्र में शाक्य और लोधी समाज के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने पर जोर बताया जा रहा है। वहीं गोरखपुर क्षेत्र से जुड़े फैसलों में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सहमति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा संगठन में यह संभावित बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा हैं और पार्टी सामाजिक संतुलन के जरिए प्रदेश में अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।













