नई दिल्ली। सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में ट्रैफिक सिग्नल की अहम भूमिका होती है। इसी महत्व को रेखांकित करने के लिए हर वर्ष 5 अगस्त को ट्रैफिक लाइट दिवस (Traffic Light Day) मनाया जाता है। यह दिन दुनिया के पहले इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल की शुरुआत की याद में मनाया जाता है।
इतिहास के अनुसार, 5 अगस्त 1914 को अमेरिका के क्लीवलैंड शहर में दुनिया का पहला इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल लगाया गया था। उस समय सिग्नल में केवल लाल और हरे रंग की लाइटें थीं। लाल रंग का अर्थ था रुकना, जबकि हरा रंग आगे बढ़ने का संकेत देता था।
बाद के वर्षों में यातायात को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पीले रंग की तीसरी लाइट जोड़ी गई। पीली बत्ती का उद्देश्य वाहन चालकों को सावधान करना और रुकने या आगे बढ़ने के लिए तैयार रहने का संकेत देना है।
आज ट्रैफिक सिग्नल दुनिया भर की यातायात व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ये न केवल सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करते हैं, बल्कि चौराहों पर यातायात को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ट्रैफिक लाइट दिवस का उद्देश्य लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और सुरक्षित एवं जिम्मेदार ड्राइविंग के लिए प्रेरित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और सभी के लिए सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।









