नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपने की जानकारी सोशल मीडिया मंच X पर सार्वजनिक की। यह फैसला NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद, लगातार छात्र आंदोलनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पत्र में कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों के भविष्य को लंबी राजनीतिक और कानूनी जटिलताओं से बचाना है। उन्होंने लिखा कि देशभर में बने हालात और जंतर-मंतर पर चल रहे घटनाक्रम को देखते हुए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने का निर्णय लिया। साथ ही उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस स्थिति का कोई भी तत्व अनुचित लाभ उठाए।
इस्तीफे की प्रमुख वजहें:
- NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद और प्रश्नपत्र लीक के आरोप।
- परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन।
- दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर लगातार आंदोलन और सरकार पर बढ़ता दबाव।
- सरकार और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता से पहले लिया गया बड़ा राजनीतिक फैसला।
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को हुआ। वे वर्ष 2021 से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वे केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री तथा इस्पात मंत्री जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार के अगले कदम और नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आनी शुरू हो गई हैं।









