वाराणसी। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को धर्म और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब श्री काशी विश्वनाथ की वार्षिक कलश यात्रा पूरे धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। राजेंद्र प्रसाद घाट से शुरू हुई इस भव्य यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा शहर गूंज उठा।
यात्रा का विशेष आकर्षण देश की विभिन्न नदियों और तीर्थस्थलों से लाए गए पवित्र जल से भरे 11 रजत कलश रहे। इनमें झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, गोदावरी सहित काशी, हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगाजल को शामिल किया गया था। इसके अलावा श्रद्धालु 1008 कलश सिर पर धारण कर बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए यात्रा में शामिल हुए।
वैदिक मंत्रोच्चार और गंगा आरती के बाद यात्रा राजेंद्र प्रसाद घाट से निकलकर दशाश्वमेध, गोदौलिया, हौजकटोरा, बांसफाटक और ज्ञानवापी मार्ग से होते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने 1008 कलशों के पवित्र जल से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक कर देश और समाज के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
कलश यात्रा में पीएसी बैंड, नंदी पर विराजमान शिव-पार्वती की झांकी, शंखध्वनि, डमरू दल और पीली साड़ियों में सुसज्जित महिलाओं की सहभागिता ने आध्यात्मिक वातावरण को और भव्य बना दिया। मार्ग में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा शर्बत, अमरस और शीतल जल का वितरण किया।
सुप्रभातम एवं श्रीकाशी मोक्षदायिनी सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन में कई धार्मिक, सामाजिक और व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम संयोजक निधि देव अग्रवाल ने बताया कि शंकराचार्य की प्रेरणा से वर्ष 1999 में शुरू हुई यह कलश यात्रा आज काशी की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल हो चुकी है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी इसके महत्व को और बढ़ा रही है।













