नई दिल्ली। भारतीय रेलवे देश में सेमी हाईस्पीड रेल नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है। चालू वित्त वर्ष में करीब 2,700 करोड़ रुपये की लागत से 27 नई वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण की तैयारी है। इन ट्रेनों का उत्पादन चेन्नई, रायबरेली और कपूरथला स्थित रेल कोच निर्माण इकाइयों में किया जा रहा है।
नई वंदे भारत ट्रेनों में यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चेयरकार के साथ स्लीपर कॉन्फिगरेशन भी शामिल किया जा रहा है। इससे लंबी दूरी के यात्रियों को तेज सफर के साथ रात में यात्रा करने की सुविधा मिल सकेगी।
1,000 ट्रेनों का बड़ा लक्ष्य
रेलवे ने आने वाले वर्षों में वंदे भारत ट्रेनों की संख्या में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी का लक्ष्य तय किया है। दीर्घकालिक योजना के तहत करीब 1,000 वंदे भारत ट्रेनें तैयार करने की तैयारी है। इस परियोजना के लिए लगभग 35,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार के साथ रेलवे का फोकस देश के अलग-अलग शहरों के बीच तेज और आधुनिक रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है।
280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन पर काम
इसी दिशा में भारतीय रेलवे हाईस्पीड ट्रेन तकनीक को विकसित करने पर भी काम कर रहा है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) चेन्नई और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) मिलकर स्वदेशी हाईस्पीड ट्रेन तैयार कर रहे हैं।
प्रस्तावित ट्रेन की अधिकतम गति करीब 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना है। इसके जरिए देश में भविष्य के हाईस्पीड रेल परिवहन के लिए स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।






















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