वाराणसी। जिले के नवागत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने पदभार ग्रहण करने के अगले ही दिन स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने विभागीय योजनाओं और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिले की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट किया कि काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ कार्यालय में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की बिंदुवार समीक्षा की जा रही है। इसमें एंबुलेंस सेवा, जननी सुरक्षा योजना, टेली रेडियोलॉजी, मोबाइल मेडिकल यूनिट और न्यूरोसिटी जैसी योजनाएं शामिल हैं।
एंबुलेंस व्यवस्था पर विशेष फोकस
बुधवार को सीएमओ ने एंबुलेंस सेवा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित नोडल एजेंसी के साथ बैठक की। इस दौरान एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस की उपलब्धता और संचालन व्यवस्था की जानकारी ली गई।
जिले में इस समय 102 नंबर की 38 और 108 नंबर की 28 एंबुलेंस संचालित होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा पांच एंबुलेंस ऐसी हैं, जिनमें जीवन रक्षक उपकरणों की सुविधा उपलब्ध है।
सीएमओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरतमंद मरीज तक एंबुलेंस तय समय के भीतर पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल कराने और वास्तविक परिस्थितियों में एंबुलेंस की रिस्पांस टाइम की जांच करने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की भी होगी पड़ताल
स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रगति के साथ मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिले की स्थिति को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। सीएमओ ने कहा कि पूर्व में सामने आई कमियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित किया जा रहा है।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के मामले में पूर्व सीएमओ मुकेश कुमार को शासन स्तर से निलंबित कर जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। ऐसे में नए सीएमओ ने कार्यभार संभालते ही विभागीय व्यवस्थाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
सीएमओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की लापरवाही न हो।























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