रायपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब छत्तीसगढ़ में साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण सामग्री तक महंगी हो गई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन खर्च बढ़ गया है, जिसका असर रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं पर पड़ रहा है। एलपीजी गैस सिलेंडर, विशेषकर कमर्शियल सिलेंडर महंगे होने से होटल और खानपान कारोबारियों ने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं।
अब समोसा, कचौड़ी और अन्य नाश्ते की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। होटल और रेस्टोरेंट में थाली का खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। केटरिंग कारोबारियों का कहना है कि शादी और आयोजनों में भोजन की लागत तेजी से बढ़ रही है।
दूध महंगा होने का असर दही और पनीर पर भी पड़ा है। कई जगह पनीर की कीमत 480 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं सोया तेल और राइस ब्रान तेल जैसे खाद्य तेलों के दामों में भी भारी उछाल आया है।
प्लास्टिक दाने और स्क्रैप महंगे होने से पैकिंग सामग्री, पाउच और अन्य प्लास्टिक उत्पादों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसका असर पैक्ड फूड और डेयरी उत्पादों पर दिखाई दे रहा है।
निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से मकान बनाना भी महंगा हो गया है। सीमेंट, सरिया, गिट्टी और रेत की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निर्माण लागत में बड़ा उछाल आया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी इससे अछूता नहीं है। कॉपर और धातुओं की कीमतें बढ़ने से एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और बिजली उपकरण महंगे हो गए हैं। बाजार में कई एसी मॉडल की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
कपड़ा कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल और आयात लागत बढ़ने से कपड़ों की कीमतों में भी 20 से 25 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। इसका असर शादी और त्योहारों की खरीदारी पर पड़ रहा है।
सब्जियों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। टमाटर, हरी मिर्च, फ्रेंच बींस, नींबू, करेला और भिंडी जैसी सब्जियां महंगी बिक रही हैं। व्यापारियों के अनुसार गर्मी और परिवहन लागत बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।













