वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र के चिरईगांव ब्लॉक स्थित बरियासनपुर गांव विकास के दावों की हकीकत बयां कर रहा है, जहां आज़ादी के 78 साल बाद भी बुनियादी सुविधाएं अधूरी हैं। गांव की मुख्य सड़क पर अब तक स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।
इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों ग्रामीणों का आना-जाना होता है। हैरानी की बात यह है कि इसी सड़क के किनारे चिरईगांव पुलिस चौकी, एक इंग्लिश मीडियम स्कूल, प्राइमरी विद्यालय और सरकारी पशु चिकित्सालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान मौजूद हैं, बावजूद इसके रोशनी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही रास्ता खतरनाक बन जाता है। महिलाओं और बच्चों के लिए इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो जाता है। कई बार दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है, वहीं आपराधिक घटनाओं का डर भी लोगों को सताता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला, जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव के प्रधान की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि आखिर विकास कार्य कागजों तक ही सीमित क्यों हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर रोशनी कोई विलासिता नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरत है। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।









